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महाविद्यालय के सम्बन्ध मे
प्रधानाचार्या की कलम से
 

नरवल क्षेत्र जो गणेश शंकर विद्यार्थी की कर्म भूमि के रूप में प्रसिद्ध है | श्री गणेश शंकर विद्यार्थी एक कर्म योगी थे उन्होंने स्वतन्त्रता आन्दोलन में अपने लेखनी के माध्यम से सक्रिय भूमिका निभाई थी | उनके संघर्ष त्याग वलिदान को ध्यान में रखते हुए डॉ. वी.एन. शुक्ला जी ने नरवल  क्षेत्र में उच्च शिक्षा संस्स्थान की स्थापना की जिससे छात्र-छात्राओं के माध्यम से नरवल  क्षेत्र का समुचित रूप से विकास  हो सके |
डॉ. शुक्ल एक युगपुरूष थे | उनके विषय में जितना कहें कम है |उनकी प्रशंसा में कहे गये शब्द सूरज को दीपक दिखानें  जैसा होगा | उन्होंने अपनी शक्ति और सामर्थ का प्रयोग सदैब दूसरों की सहायता उनकी समस्याओं के समाधान हेतु किया | जब तक उनका जीवन था, वह दूसरों के लिए समर्पित थे | उनका सिर्फ एक ही उद्देश्य था, परोपकार |
यह मेरा दुर्भाग्य था कि मुझें उनके साक्षात् दर्शन नहीं हुए क्यूंकि जब मुझे इस महाविद्यालय  में सेवा करने का सुअवसर  प्राप्त हुआ, तब वह चिरनिंद्रा में लीं हो गए थे लेकिन उनके सत्कर्म नरवल क्षेत्र के कोने-कोने में दिखाई देते हैं | वह लोगो के दिलो में आज भी मौजूद हैं, क्यूंकि जब भी उनकी चर्चा होती है तो लोगों की आंखे अवश्य नम हो जाती हैं | उन्हें संत कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा, क्यूंकि संतों का जीवन सदैव दूसरों के लिए समर्पित होता है, उनकी हर ख्वाहिश में दूसरों का हित होता है | ठीक उसी तरह डॉ. शुक्ल  जी भी यही चाहते थे की नरवल क्षेत्र का चहुँमुखी विकास हो और इसी सोच के साथ उन्होंने गणेश शंकर महाविद्यालय की नीव रखी, जिससे इस महाविद्यालय से 
पढ़कर  निकलने वाले छात्र-छात्राएं न सिर्फ पुस्तकीय ज्ञान लेकर आगे बढ़ें बल्कि अच्छे नागरिक और देश की सेवा का जज्वा लिया हुए अपने लक्ष्य को पाने का प्रयास करें |इससे न सिर्फ नरवल क्षेत्र का विकास होगा, बल्कि वह जहाँ भी जाएँगे अपनी प्रतिभा से देश का नाम रोशन करेंगे|
 हमारे महाविद्यालय में अध्ययन-अध्यापन की समुचित व्यवस्था है, यहाँ कला संकाय की स्नातक स्तर की कक्षाएं संचालित हो रही हैं, लकिन निकट भविष्य में परास्नातक कक्षाएं एवं अन्न रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों   को आरंभ करने की योजना है |
छात्र-छात्राएं महाविद्यालय  में महज पुस्तकीय ज्ञान अर्जित करने ही नहीं आते, वरन् उनके मन मस्तिक में महाविद्यालमीन वातावरण एवं शिक्षकों का प्रभाव भी पढता रहता है|इसके फलस्वरूप ही उनमें भावनात्मक चिंतन एवं रचनात्मक गुणों की क्षमता का विकास होता है | मैं आशा करती हूँ की प्रवेश लेने वाले सभी छात्र-छात्राएं अध्ययन के प्रति सचेत रहकर अपेछित अनुशासन का पालन करेंगे साथ ही महाविद्यालय की समस्त गतिविधिओं में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएँगे |
मैं महाविद्यालय के समस्त छात्र-छात्राओं की उज्जवल भविष्य की कामना करती हूँ |

(डॉ. कान्ता गुप्ता)
प्राचार्या